पापा का है सपना
बस इस लिए !
लेता हूँ मैं उड़ान, भरता हूँ परों में जान
बस इसलिए !
पाता हूँ रोज नयी मंजिलें, छुता हूँ नए आकाश
बस इसलिए !
पापा को मुझ में है विस्वास
बस इसलिए !
पापा का है ....
हज़ारों मेघ तम के घेर लें, चाहे मुझे लेकिन
उन्हें अपनी ज्योति पे है विस्वास
बस इसलिए !
फैलाता हूँ मैं प्रकाश
बस इसलिए !
थकता हूँ मैं भी रोज, गिरता हूँ मैं भी
भरता हूँ सीने में नयी सांस
बस इसलिए !
पाना है कुछ ख़ास
बस इसलिए !
पापा का है ....
Sunday, 29 November 2009
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