Sunday, 29 November 2009

क्या करैं हम खुदा ....

क्या करैं हम खुदा, तू बता दे हमे
हम हैं मजबूर तेरे जहां में खड़े !

वो तो मुमकिन नहीं था की, ये सर कटे
वर्ना आशिक बड़े, हम थे तेरे !!

तेरे बन्दों ने इतना करम ही किया
काट डाले मेरे हाथ लम्बे बड़े !!!

मैं तेरी बंदिशों से परेसान हूँ
या तो कर तू रहम, या मिटा दे मुझे !!!!

क्या करैं हम खुदा ....

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