हम नहीं जानते की हम कौन हैं, ना ये की हम क्या हैं! बात सिर्फ ये नहीं है बात ये भी है की हम जानना भी नहीं चाहते हैं | अँधेरा है तो हम अँधेरे मै ही खुश हैं ! खुश ? नहीं !!! हम खुश तो कभी नहीं हैं, हम तो बस हैं, हम बस ये ही समझ पाए हैं की हम हैं |
अब ये होना भी कोई होना है जिस होने में कोई चेतना ही ना हो | चेतना ? जी हाँ चेतना, चेतना का साधारण सा अर्थ है 'जागरूकता' | अगर हम अपने आप के प्रति जागरूक हो जायें तो कोई कारन नहीं की हम वो सब कुछ पा लें जो हम पाना चाहते हैं हमेशा से | आंतरिक या बाहरी आकांशा जो भी हो वो जागरूकता से पायी जा सकती है | क्रमश :
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