मन मे अन्तर्द्वंद है,
सब दरवाजे बंद हैं
मेरे ईश्वर क्या करूँ....
खोजा, पर ना पा सका,
मुश्किल पथ ना जा सका
मेरे ईश्वर क्या करूँ....
साहस तुमसे पाया है,
फिर मन क्योँ घबराया है
मेरे ईश्वर क्या करूँ...
दिखा नहीं कोई रास्ता,
इसीलिए उदास था
मेरे ईश्वर क्या करूँ....
तुम हाथ मे मेरा हाथ लो,
मुझे मुश्किलों से उबार लो
मेरे संग चलो, मेरे साथ हो
ये ही बस अरमान है
मेरे ईश्वर क्या करूँ.....
Friday, 18 December 2009
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